Shree Shyam Chorasi :
!! श्री श्याम चोपाई !!
!! दोहा !!
नागसुता सुत श्याम को, सुमिरुं बारम्बार ! खाटू वाले श्यामजी, सब जग के दातार !
काव्य कला जानूं नहीं, अहूं निपट अज्ञान ! ज्ञान ध्यान मोहि दीजिए, आकर कृपानिधान !
गुरु पद पंकज ध्यान धर, सुमिर सच्चीदानंद ! श्याम चोरासी भजत हूँ, रच चोपाई छन्द !!
!! चोपाई !!
महर करो जन के सुखरासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! प्रथम शीश चरण में नाऊं !
कृपा दृष्टि रावरी चाहूं !! माफ़ सभी अपराध कराऊँ ! आदि कथा सुछन्द रच गाऊं !!
भक्त सुजन सुनकर हरसासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! कुरु पांडव में विरोध जब छाया !
समर महाभारत रचवाया !! बली एक बर्बरीक आया ! तीन सुबाण साथ में लाया !!
यह लखि हरि को आई हांसी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! मधुर वचन तब कृष्ण सुनाए !
समर भूमि केही कारण आए !! तीन बाण धनु कंध सुहाए ! अजब अनोखा रूप बनाए !!
बाण अपार वीर सब ल्यासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! बर्बरीक इतने दल माहीं !
तीन बाण की गिनती नाहीं !! योद्धा एक से एक निराले ! वीर बहादुर अति मतवाले !!
समर सभी मिल कठिन मचासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! बर्बरीक मम कहना मानो !
समर भूमि तुम खेल न जानो !! भीषम द्रोण कृप आदि जुझारा ! जिनसे पारथ का मन हारा !!
तू क्या पे पेस इन्हीं से पासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! बर्बरीक हरि से यों कहता !
समर देखना मैं हूँ चाहता !! कौन बली रणशुर निहारूँ ! वीर बहादुर कौन जुझारु !!
तीन लोक त्रिबाण से मारूं ! हंसता रहूं कभी न हारूं ! सत्य कहूं हरि झूठ न जानो !
दोनों दल इक तरफ हों मानो !! एक बाण दल दोऊ खपासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
बर्बरीक से हरि फरमावे ! तेरी बात समझ नहीं आवे !! प्राण बचाओ तुम घर जाओ !
क्यों नादानपना दिखलाओ !! तेरी जान मुफ्त में जासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
गर विशवास न तुम्हें मुरारी ! तो कर लीजे जांच हमारी !! यह सुन कृष्ण बहुत हर्षाए !
बर्बरीक से वचन सुनाए !! मैं अब लेहूं परीछा खासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
पात विटप के सभी निहारो ! बेध एक शर से डारो !! कह इतना एक पात मुरारी !
दबा लिया पद तले करारी !! अजब रची माया अविनाशी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
बर्बरीक धनु-बाण चढाया ! जानी जाय न हरि की माया !! विटप निहार बली मुस्काया !
अजित अमर अहिलावति जाया !! बली सुमिर शिव बाण चालीसा ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
बाण बली ने अजब चलाया ! पत्ते बेध विटप के आया !! गिरा कृष्ण के चरणों माहीं !
बिंधा पात हरि चरण हटाहीं !! इससे कौन फतेह किमि पासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
कृष्ण बली कहै बताओ ! किस दल की तुम जीत कराओ !! बली हार का दल बतलाया !
यह सुन कृष्ण सनाका खाया !! विजय किस विध पारथ पासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
छल करना तब कृष्ण विचारा ! बली से बोले नन्द कुमारा !! ना जाने क्या ज्ञान तुम्हारा !
कहना मानो बली हमारा !! हो इक तरफ नाम पा जासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
कहै बर्बरीक कृष्ण हमारा ! टूट न सकता प्रण ये करारा !! मांगे दान उसे मैं देता !
हारा देख सहारा देता !! सत्य कहूं ना झूठ जरा सी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
बेशक वीर बहादुर तुम हो ! जंचते दानी हमें न तुम हो !! कहै बर्बरीक हरि बतलाओ !
तुमको चाहिए क्या बतलाओ ! जो मांगे सो हमसे पासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
बली अगर तुम सच्चे दानी ! तो मैं तुमसे कहूँ बखानी !! समर भूमि बली देने खातिर !
शीश चाहिए एक बहादुर !! शीश दान दे नाम कमासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
हम तुम अर्जुन तीनों भाई ! शीश दान दे को बलदाई !! जिसको आप योग्य बतलावें !
वही शीश बलिदान चढ़ावें !! आवागमन मिटे चोरासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
अर्जुन नाम समर में पावे ! तुम बिन सारथी कौन कहावे !! शीश दान दीन्हौं भगवाना !
भारत देखन मन ललचाना !! शीश शिखर गिरि पर धरवासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
शीश दान बर्बरीक दिया है ! हरि ने गिरि पर धरा दिया है !! समर अठारह रोज हुआ है !
कुरु दल सारा नाश हुआ है !! विजय पताका पाण्डु फहरासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
भीम नकुल सहदेव और पारथ ! करते निज तारीफ अकारथ !! यों सोच मन में यदुराया !
इनके दिल अभिमान है छाया !! हरि भगतों का दुःख मिटासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
पारथ भीम आदि बलधारी ! से यों बोले गिरवरधारी !! किसने विजय समर में पाई !
पूछो वीर बर्बरीक से भाई !! सत्य बात सिर सभी बतासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
हरि सबको संग ले गिरवर पर ! सिर बैठा था मगन शिखर पर !! जा पहुँचे झटपट नन्दलाला !
पुनि पूछा सिर से सब हाला !! शीश दान है खुद अविनाशी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
हरि यों कहै सही फरमाओ ! समर जीत है कौन बताओ !! बली कहै मैं सत्य बताऊं !
नहीं पितु चचा बलि न ताऊ !! भगवद ने पाई शाबाशी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
चक्र सुदर्शन है बलदाई ! काट रहा था दल जिमि काई !! रूप द्रौपदी काली का धर !
हो विकराल ले कर में खप्पर !! भर-भर रुधिर पिए थी प्यासी !! सांवलशाह खाटू के वासी !!
मैंने जो कछु समर निहारा ! सत्य सुनाया हाल है सारा !! सत्य वचन सुनकर यदुराई !
वर दीन्हा सिर को हर्षाई !! श्याम रूप मम धार पुजासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
कलि में तुमको श्याम कन्हाई ! पूजेंगे सब लोग लुगाई !! खीर चूरमा भोग लगावे !
माखन मिश्री खूब चढ़ावे !! मन वच कर्म से जो कोई ध्यासी ! इचिछत फल सो ही पा जासी !!
अन्त समय सद्गगति पा जासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! सागर सा धनवान बनाना !!
पतनी गोद में सुवन खिलाना !! सेवक आया शरण तिहारी ! श्रीपति यदुपति कुंज बिहारी !!
सब सुख दायक आनन्द रासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!
चोपाई
श्याम चोरासी है रची, भक्त जनन के हेतु ! 'पवन' निशि बासर पढ़े, सकल सुमंगल हेतु !!
लख चोरासी छूटीए , श्याम चोरासी गाय ! अछत अपार फल पायकर , आवागमन मिटाए !!





